नमस्ते दोस्तों! क्या आप भी मेरी तरह सोचते हैं कि आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में फिटनेस के लिए समय निकालना कितना मुश्किल है? मैं खुद भी पहले यही सोचती थी, लेकिन जब से मैंने इंटरवल रनिंग को अपनी दिनचर्या में शामिल किया है, मेरा नज़रिया ही बदल गया है!
मुझे याद है कि पहले थोड़ी देर दौड़ने के बाद ही मेरी साँस फूलने लगती थी, लेकिन अब तो घंटों एक्सरसाइज करने के बाद भी उतनी थकान महसूस नहीं होती. यह सिर्फ़ एक व्यायाम नहीं, बल्कि एक स्मार्ट तरीका है अपनी स्टैमिना को बढ़ाने का, वो भी कम समय में.
आजकल की फिटनेस दुनिया में इसकी धूम मची हुई है, क्योंकि यह न सिर्फ़ आपकी एंड्योरेंस को बढ़ाता है, बल्कि वज़न घटाने और दिल को मज़बूत रखने में भी कमाल का असर दिखाता है.
अगर आप भी अपनी फिटनेस यात्रा को एक नई दिशा देना चाहते हैं और अपनी सीमाओं को तोड़ना चाहते हैं, तो यह पोस्ट आपके लिए ही है. मैं आपको अपने अनुभव से बताऊँगी कि कैसे आप भी इंटरवल रनिंग से अपनी सहनशक्ति को आसमान छू सकते हैं.
तो चलिए, आज हम इसी बेहतरीन तकनीक के बारे में विस्तार से जानते हैं और देखते हैं कि यह कैसे आपके शरीर और मन को मज़बूती देता है. इस पोस्ट में हम इंटरवल रनिंग के फायदे, इसे शुरू करने का तरीका और कुछ ज़रूरी टिप्स पर गहराई से बात करेंगे, ताकि आप अपनी फिटनेस यात्रा में सफल हो सकें.
तो, आइए नीचे दिए गए लेख में इसके बारे में और गहराई से जानते हैं!
आखिर क्यों इंटरवल रनिंग है फिटनेस का नया जादू?

कम समय में कमाल के फायदे: मेरा अनुभव
शरीर और दिमाग दोनों के लिए एक साथ काम
दोस्तो, मैं आपको बताऊं, जब मैंने पहली बार इंटरवल रनिंग के बारे में सुना था, तो मुझे लगा कि यह भी कोई नया फैड होगा जो कुछ दिनों में गायब हो जाएगा. लेकिन सच कहूँ तो, इसे अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाने के बाद, मेरी फिटनेस जर्नी ने एक बिल्कुल नया मोड़ ले लिया है!
मुझे याद है, स्कूल के दिनों में जब पी.टी. क्लास होती थी और थोड़ी देर दौड़ने के बाद ही मेरी साँस फूलने लगती थी, और मैं थककर बैठ जाती थी. तब मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन मैं घंटों तक बिना थके एक्सरसाइज कर पाऊँगी.
इंटरवल रनिंग ने मुझे यह कॉन्फिडेंस दिया है. यह सिर्फ़ तेज़ी से दौड़ना और फिर आराम करना नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर की सहनशक्ति को इस तरह से बढ़ाता है कि आप खुद हैरान रह जाएंगे.
मेरा तो अनुभव रहा है कि इससे मेरी स्टैमिना इतनी बढ़ गई है कि अब मैं लंबी मैराथन के बारे में भी सोचने लगी हूँ! सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लिए आपको घंटों जिम में पसीना बहाने की ज़रूरत नहीं पड़ती.
आप अपने बिजी शेड्यूल में भी इसके लिए आसानी से समय निकाल सकते हैं. यह एक स्मार्ट वर्कआउट है जो आपको कम समय में ज़्यादा से ज़्यादा फायदे देता है, और यही चीज़ इसे आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी के लिए एकदम परफेक्ट बनाती है.
अपनी इंटरवल रनिंग यात्रा कैसे शुरू करें?
शुरुआती लोगों के लिए एक आसान गाइड
सही वार्म-अप और कूल-डाउन का महत्व
चलिए, अब बात करते हैं कि इस कमाल की इंटरवल रनिंग को अपनी दिनचर्या में शामिल कैसे किया जाए. मुझे पता है कि कई लोग सोचते होंगे कि यह बहुत मुश्किल होगा, लेकिन मैं आपको विश्वास दिलाती हूँ कि ऐसा बिल्कुल नहीं है!
जब मैंने इसे शुरू किया था, तो मैं भी थोड़ी नर्वस थी, लेकिन कुछ ही दिनों में मुझे इसकी आदत हो गई. सबसे पहले, किसी भी नई एक्सरसाइज को शुरू करने से पहले, अपने डॉक्टर से सलाह लेना न भूलें, यह बहुत ज़रूरी है.
एक बार जब आपको हरी झंडी मिल जाए, तो शुरुआत धीरे-धीरे करें. मेरा सुझाव है कि आप 30 सेकंड की तेज़ दौड़ और 90 सेकंड की धीमी गति से जॉगिंग या पैदल चलने से शुरू करें.
इस चक्र को 15-20 मिनट तक दोहराएं. आप हफ्ते में 2-3 बार इससे शुरुआत कर सकते हैं. मुझे याद है, पहले कुछ सेशन में मुझे थोड़ी थकान महसूस हुई थी, लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी और धीरे-धीरे अपने समय और तीव्रता को बढ़ाया.
अपने शरीर की बात सुनना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि हर किसी का शरीर अलग होता है और उसकी ज़रूरतें भी अलग होती हैं. वार्म-अप और कूल-डाउन को बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ न करें.
5-10 मिनट का वार्म-अप जैसे कि हल्की जॉगिंग या गतिशील स्ट्रेचिंग आपकी मांसपेशियों को तैयार करेगा, और वर्कआउट के बाद 5-10 मिनट का कूल-डाउन और स्ट्रेचिंग मांसपेशियों के दर्द को कम करने में मदद करेगा.
यह न केवल चोटों से बचाता है, बल्कि आपकी परफॉर्मेंस को भी बेहतर बनाता है.
इंटरवल रनिंग: अलग-अलग तरीके और बदलाव
पहाड़ी दौड़ से लेकर फटलेक प्रशिक्षण तक
अपनी सीमाओं को तोड़ने के नए तरीके
अब जब आप इंटरवल रनिंग के मूल सिद्धांतों को समझ गए हैं, तो आइए कुछ रोमांचक तरीकों पर नज़र डालते हैं जिनसे आप इसे और भी मजेदार और प्रभावी बना सकते हैं. मैंने खुद इन सभी तरीकों को आजमाया है और हर एक का अपना अलग ही मज़ा और फायदा है.
सिर्फ़ सपाट ज़मीन पर दौड़ने की बजाय, पहाड़ी दौड़ या “हिल स्प्रिंट” ट्राई करें. ये आपके पैरों की मांसपेशियों को और भी मज़बूत बनाते हैं और आपकी सहनशक्ति को एक नए स्तर पर ले जाते हैं.
जब मैंने पहली बार पहाड़ी दौड़ की थी, तो मेरे पैर जवाब दे गए थे, लेकिन उस चुनौती को पार करने के बाद जो संतुष्टि मिली, वह अद्भुत थी! दूसरा तरीका है फटलेक प्रशिक्षण, जिसका मतलब है “स्पीड प्ले”.
इसमें आप अपनी गति को अपनी मर्जी से बदलते रहते हैं – कभी तेज़, कभी धीमी, कभी मीडियम. इसमें कोई सख्त नियम नहीं होता, बस अपनी फीलिंग्स के हिसाब से दौड़ना होता है, जो इसे बहुत ही लचीला और मजेदार बनाता है.
मुझे यह तरीका बहुत पसंद है जब मैं अपने वर्कआउट को थोड़ा अनप्रिडिक्टेबल और रोमांचक बनाना चाहती हूँ. आप ट्रैक इंटरवल भी कर सकते हैं, जहाँ आप ट्रैक पर निर्धारित दूरी के लिए तेज़ दौड़ते हैं और फिर रिकवरी के लिए धीरे चलते हैं.
ये सभी तरीके आपके शरीर को अलग-अलग तरीकों से चुनौती देते हैं, जिससे आपकी फिटनेस का स्तर लगातार बढ़ता रहता है. याद रखें, एक ही रूटीन से बोर होने से बेहतर है कि आप अलग-अलग तरीकों को आजमाते रहें.
सही पोषण: इंटरवल रनिंग के लिए ईंधन
वर्कआउट से पहले और बाद में क्या खाएं
हाइड्रेशन का महत्व और मेरी पसंदीदा ड्रिंक्स
दोस्तों, सिर्फ़ कड़ी मेहनत ही काफ़ी नहीं होती, सही पोषण भी उतना ही ज़रूरी है जितना कि खुद वर्कआउट. मैंने अपने अनुभव से सीखा है कि अगर आपका शरीर अंदर से मज़बूत नहीं है, तो आप कितना भी ज़ोर लगा लें, उतनी अच्छी परफॉर्मेंस नहीं दे पाएंगे.
इंटरवल रनिंग जैसी तीव्र गतिविधि के लिए आपके शरीर को सही ईंधन की ज़रूरत होती है. वर्कआउट से लगभग 1-2 घंटे पहले, कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट्स जैसे ओट्स, साबुत अनाज की ब्रेड, या एक केला खाना बहुत फायदेमंद होता है.
ये आपको दौड़ने के लिए ज़रूरी ऊर्जा प्रदान करते हैं. मुझे याद है एक बार मैंने बिना कुछ खाए दौड़ना शुरू कर दिया था, और 10 मिनट के अंदर ही मुझे चक्कर आने लगे थे, तब से मैंने यह गलती दोबारा नहीं की!
वर्कआउट के बाद, मांसपेशियों की रिकवरी के लिए प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट्स का मिश्रण ज़रूरी है. प्रोटीन शेक, अंडे, या चिकन ब्रेस्ट के साथ कुछ फल या सलाद एक बढ़िया विकल्प हैं.
| फायदा | विवरण |
|---|---|
| वजन घटाने में सहायक | तेज और धीमी गति के अंतराल कैलोरी बर्न को बढ़ाते हैं और चयापचय (metabolism) को तेज करते हैं। |
| सहनशक्ति में वृद्धि | हृदय और फेफड़ों को मजबूत करता है, जिससे आप लंबे समय तक बिना थके काम कर पाते हैं। |
| हृदय स्वास्थ्य में सुधार | हृदय की मांसपेशियों को मजबूत करता है और रक्त संचार को बेहतर बनाता है। |
| कम समय में अधिक प्रभाव | पारंपरिक वर्कआउट की तुलना में कम समय में अधिक कैलोरी बर्न होती है और फिटनेस बढ़ती है। |
| मानसिक मजबूती | चुनौतियों का सामना करने और सीमाओं को तोड़ने से आत्मविश्वास बढ़ता है। |
और हां, पानी पीना बिल्कुल न भूलें! डिहाइड्रेशन आपकी परफॉर्मेंस को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है. मैं हमेशा अपने साथ एक पानी की बोतल रखती हूँ और वर्कआउट से पहले, दौरान और बाद में पर्याप्त पानी पीती हूँ.
इसके अलावा, नारियल पानी या घर में बनी नींबू पानी जैसी चीज़ें इलेक्ट्रोलाइट्स को बनाए रखने में मदद करती हैं, खासकर अगर आप गर्मी में दौड़ रहे हों.
चुनौतियों का सामना और प्रेरणा कैसे बनाए रखें

जब मन करे हार मानने को: मेरी टिप्स
अपने लक्ष्य निर्धारित करना और उन्हें हासिल करना
दोस्तों, किसी भी फिटनेस जर्नी में चुनौतियाँ तो आती ही हैं. कई बार ऐसा होता है कि सुबह उठने का मन नहीं करता, या वर्कआउट करने का बिल्कुल मूड नहीं होता. मैंने भी इन दिनों का सामना किया है.
मुझे याद है, एक बार तो लगातार बारिश हो रही थी और मुझे लगा कि आज तो बस रहने ही देते हैं, लेकिन फिर मैंने सोचा, “नहीं, खुद से किया हुआ वादा तोड़ना नहीं है.” ऐसे में सबसे पहले अपनी मानसिकता को मजबूत बनाना ज़रूरी है.
अपने छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित करें, जैसे कि “आज मैं 5 मिनट ज़्यादा दौड़ूँगी” या “आज मैं एक और इंटरवल पूरा करूँगी.” जब आप इन छोटे लक्ष्यों को प्राप्त करते हैं, तो आपको जो खुशी मिलती है, वह आपको आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है.
मैं हमेशा अपने वर्कआउट को थोड़ा मज़ेदार बनाने की कोशिश करती हूँ. कभी नए गाने सुनती हूँ, कभी पॉडकास्ट सुनती हूँ, और कभी अपने किसी दोस्त को साथ में चलने के लिए मना लेती हूँ.
किसी वर्कआउट पार्टनर का होना भी बहुत मददगार होता है, क्योंकि आप एक-दूसरे को प्रेरित करते रहते हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात, अपने प्रति दयालु रहें. कभी-कभी, अगर आप एक दिन वर्कआउट नहीं कर पाए, तो कोई बात नहीं.
अगले दिन दोगुने जोश के साथ वापस आएं. अपनी प्रोग्रेस को ट्रैक करना भी बहुत मोटिवेटिंग होता है. जब आप देखते हैं कि आपने कितना सफर तय कर लिया है, तो आपको और भी आगे बढ़ने की इच्छा होती है.
मेरी व्यक्तिगत यात्रा: इंटरवल रनिंग ने कैसे बदल दी मेरी ज़िंदगी
एक आलसी लड़की से फिटनेस फ्रीक तक का सफर
अकल्पनीय बदलाव और आत्मविश्वास में वृद्धि
मैं आपको सच बताऊँ, कुछ साल पहले तक, मैं ‘फिटनेस’ शब्द से कोसों दूर थी. मेरा जीवन बस खाने-पीने और नेटफ्लिक्स देखने तक ही सीमित था. सीढ़ियाँ चढ़ना भी एक बहुत बड़ी चुनौती लगती थी और ज़रा सी मेहनत में ही मेरी साँस फूल जाती थी.
लेकिन एक दिन मैंने शीशे में खुद को देखा और फैसला किया कि अब बहुत हुआ, मुझे बदलना होगा. तब मैंने इंटरवल रनिंग के बारे में सुना और, डरते-डरते ही सही, इसे आज़माने का फैसला किया.
पहले कुछ हफ्तों में, मुझे लगा कि मैं कभी इसे नहीं कर पाऊँगी. मेरे पैर दर्द करते थे, मेरी साँस अटक जाती थी, और मैं हर सेशन के बाद बहुत थका हुआ महसूस करती थी.
लेकिन मैंने हार नहीं मानी. धीरे-धीरे, मैंने अपनी गति और सहनशक्ति में सुधार देखा. सबसे पहले, मैंने महसूस किया कि मेरी सुबह की आलस गायब हो गई थी.
फिर, मैंने देखा कि मैं दिन भर ज़्यादा ऊर्जावान महसूस करने लगी थी. कुछ ही महीनों में, मेरा वज़न कम होने लगा, मेरी मांसपेशियां मजबूत होने लगीं, और सबसे बढ़कर, मेरे आत्मविश्वास में गजब का इजाफा हुआ.
अब मैं न केवल आसानी से दौड़ सकती हूँ, बल्कि मुझे अपने शरीर पर गर्व भी है. इंटरवल रनिंग ने मुझे सिखाया है कि अगर आप खुद पर विश्वास रखें और लगातार प्रयास करते रहें, तो आप कुछ भी हासिल कर सकते हैं.
यह सिर्फ़ एक वर्कआउट नहीं है, यह एक जीवनशैली है जिसने मुझे एक मजबूत और आत्मविश्वासी इंसान बनाया है.
सामान्य गलतियाँ जिनसे आपको बचना चाहिए
इन गलतियों से बचें और अपनी परफॉर्मेंस सुधारें
सही तकनीक और शरीर की सुनें
इंटरवल रनिंग के दौरान कुछ सामान्य गलतियाँ होती हैं जो मैंने खुद भी की हैं और जिनसे आप आसानी से बच सकते हैं. सबसे पहली गलती है ज़रूरत से ज़्यादा तेज़ी से शुरुआत करना.
मुझे याद है, जब मैं नई-नई थी, तो मैंने सोचा कि जितना तेज़ दौड़ूँगी, उतना जल्दी फायदा होगा, लेकिन इसका उल्टा असर हुआ और मैं जल्दी ही थक जाती थी. अपने शरीर की क्षमता से ज़्यादा दौड़ने की कोशिश न करें.
धीरे-धीरे शुरुआत करें और जैसे-जैसे आपकी सहनशक्ति बढ़ती जाए, वैसे-वैसे अपनी तीव्रता बढ़ाएँ. दूसरी गलती है वार्म-अप और कूल-डाउन को छोड़ देना. जैसा कि मैंने पहले भी बताया, ये दोनों चरण चोटों से बचने और मांसपेशियों की रिकवरी के लिए बहुत ज़रूरी हैं.
कई बार लोग रिकवरी के अंतराल को बहुत छोटा रखते हैं, जिससे शरीर को ठीक होने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता. रिकवरी फेज में पूरी तरह से आराम करना या धीमी गति से चलना महत्वपूर्ण है ताकि अगले तेज़ अंतराल के लिए आप तैयार हो सकें.
इसके अलावा, लोग अक्सर एक ही रूटीन को लंबे समय तक फॉलो करते रहते हैं, जिससे शरीर उस रूटीन का आदी हो जाता है और प्रगति रुक जाती है. अपने वर्कआउट में विविधता लाएं, अलग-अलग प्रकार के इंटरवल और अभ्यास शामिल करें.
सबसे महत्वपूर्ण बात, अपने शरीर की बात सुनना सीखें. अगर आपको दर्द महसूस हो रहा है, तो रुकें और आराम करें. अपने शरीर को चोट पहुँचाना किसी भी फिटनेस लक्ष्य से ज़्यादा महत्वपूर्ण नहीं है.
इन गलतियों से बचकर, आप अपनी इंटरवल रनिंग यात्रा को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बना सकते हैं.
आखिर में
तो दोस्तों, जैसा कि आपने देखा, इंटरवल रनिंग सिर्फ़ एक वर्कआउट रूटीन नहीं है, बल्कि यह एक जीवन बदलने वाला अनुभव हो सकता है. मैंने खुद अपनी जिंदगी में यह बदलाव महसूस किया है और मैं चाहती हूँ कि आप भी इसे अनुभव करें. यह आपको न केवल शारीरिक रूप से मज़बूत बनाएगा, बल्कि मानसिक रूप से भी आपको चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करेगा. अपनी फिटनेस यात्रा को एक नया आयाम देने के लिए आज ही इंटरवल रनिंग को अपनाएं. याद रखें, हर छोटा कदम आपको अपने लक्ष्य के करीब ले जाता है.
कुछ काम की बातें जो आपको पता होनी चाहिए
1. हमेशा अपनी क्षमता के अनुसार शुरुआत करें, एक साथ ज़्यादा ज़ोर न लगाएँ. धीरे-धीरे अपनी तीव्रता और अवधि बढ़ाएँ.
2. वार्म-अप (गरम करना) और कूल-डाउन (शरीर को ठंडा करना) को कभी नज़रअंदाज़ न करें. यह चोटों से बचाता है और मांसपेशियों की रिकवरी में मदद करता है.
3. अपने शरीर की बात सुनना सीखें. अगर आपको दर्द महसूस हो रहा है, तो रुकें और आराम करें. सेहत सबसे पहले है.
4. सही पोषण और पर्याप्त हाइड्रेशन आपकी इंटरवल रनिंग परफॉर्मेंस के लिए बेहद ज़रूरी है. वर्कआउट से पहले और बाद में सही आहार लें और पानी पीते रहें.
5. अपने वर्कआउट रूटीन में विविधता लाएँ. अलग-अलग प्रकार के इंटरवल, जैसे पहाड़ी दौड़ या फटलेक, आपको बोरियत से बचाते हैं और लगातार प्रगति सुनिश्चित करते हैं.
ज़रूरी बातों का सार
संक्षेप में, इंटरवल रनिंग एक बहुत ही प्रभावी और समय बचाने वाला तरीका है जिससे आप अपनी फिटनेस को तेज़ी से बढ़ा सकते हैं. यह आपकी सहनशक्ति, हृदय स्वास्थ्य और मानसिक मज़बूती को एक साथ बेहतर बनाता है. बस सही शुरुआत करें, अपने शरीर का ध्यान रखें, और इस यात्रा का आनंद लें. यह सिर्फ़ कुछ मिनट की कड़ी मेहनत नहीं, बल्कि अपने लिए एक बेहतर और स्वस्थ जीवन का निवेश है.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) 📖
प्र: इंटरवल रनिंग क्या है और यह सामान्य दौड़ से कैसे अलग है?
उ: अरे वाह! यह बहुत ही अच्छा सवाल है क्योंकि यहीं से सारी बात शुरू होती है. इंटरवल रनिंग, जैसा कि नाम से ही पता चलता है, तेज़ गति से दौड़ने और फिर धीमी गति से आराम करने या चलने के छोटे-छोटे चरणों को बारी-बारी से करने का एक तरीका है.
सोचिए, आप कुछ देर पूरी जान लगाकर दौड़ते हैं, फिर थोड़ी देर आराम करते हैं, या धीरे-धीरे चलते हैं, और फिर से तेज़ी से दौड़ते हैं. यह एक चक्र की तरह चलता है.
वहीं, सामान्य दौड़ में हम एक ही गति से लगातार दौड़ते रहते हैं, जैसे जॉगिंग करना. मेरे अनुभव से कहूँ तो, इंटरवल रनिंग आपके शरीर को हर बार एक नए चुनौती के लिए तैयार करती है, जिससे आपकी सहनशक्ति और गति दोनों ही तेजी से बढ़ती हैं, जबकि सामान्य दौड़ में आप एक ही ज़ोन में रहते हैं.
यह HIIT (हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग) का ही एक हिस्सा है, जिसमें कम समय में ज़्यादा फायदे मिलते हैं.
प्र: इंटरवल रनिंग से मुझे क्या-क्या फायदे मिल सकते हैं?
उ: दोस्तों, इंटरवल रनिंग के फायदे गिनने बैठो तो शायद ये पोस्ट छोटी पड़ जाए! लेकिन मैं आपको अपने सबसे पसंदीदा फायदे बताती हूँ. सबसे पहले, यह आपकी कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ को कमाल का बूस्ट देता है.
मेरा दिल पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत और स्वस्थ महसूस करता है. दूसरा, यह वज़न घटाने में बहुत असरदार है. तेज़ दौड़ने से आपकी कैलोरी बर्न होती हैं और आराम के दौरान भी शरीर फैट बर्न करता रहता है, जिसे ‘आफ्टरबर्न इफेक्ट’ कहते हैं.
मैंने खुद देखा है कि यह कैसे जिद्दी फैट को कम करने में मदद करता है. तीसरा, यह आपकी स्टैमिना और एंड्योरेंस को अविश्वसनीय रूप से बढ़ाता है. मुझे याद है जब मैं पहली बार दौड़ना शुरू कर रही थी, तब कुछ मिनटों में ही थक जाती थी, लेकिन इंटरवल रनिंग ने मुझे लंबी दूरी तक दौड़ने की ताकत दी है.
इसके अलावा, यह आपकी गति बढ़ाता है, आपके मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है, और हाँ, बोरियत को भी दूर भगाता है क्योंकि हर बार कुछ नया होता है!
प्र: एक शुरुआती के तौर पर मैं इंटरवल रनिंग कैसे शुरू कर सकता हूँ?
उ: अगर आप मेरी तरह शुरुआती हैं, तो चिंता बिल्कुल मत कीजिए! इंटरवल रनिंग शुरू करना उतना मुश्किल नहीं है जितना लगता है. मैंने भी बहुत छोटे-छोटे स्टेप्स से शुरुआत की थी.
सबसे पहले, वॉर्म-अप बहुत ज़रूरी है. 5-10 मिनट हल्की जॉगिंग या चलने से अपने शरीर को तैयार करें. फिर, आप ‘वॉक-रन’ मेथड से शुरू कर सकते हैं.
जैसे, 30 सेकंड तेज़ चलें, फिर 60 सेकंड आराम से चलें या धीरे जॉगिंग करें. इस चक्र को 15-20 मिनट तक दोहराएं. जैसे-जैसे आपकी सहनशक्ति बढ़े, आप धीरे-धीरे तेज़ दौड़ने का समय बढ़ा सकते हैं और आराम का समय कम कर सकते हैं.
हफ्ते में 2-3 बार इंटरवल रनिंग करना काफी होता है. सबसे ज़रूरी बात, अपने शरीर की सुनें. अगर आपको थकान महसूस हो रही है, तो आराम करें.
और हाँ, अच्छे रनिंग शूज़ पहनना मत भूलना, यह चोटों से बचाता है! धैर्य रखें और धीरे-धीरे आगे बढ़ें, आप देखेंगे कि कैसे आपका शरीर पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत होता जाएगा.






